पशुपालक… हत्याकांड… निगम, और नेताओं की `शराफत’!

कानून किसी का अपना नहीं होता, किंतु वर्तमान समय में कानून नेताओं के इशारों पर चलने का प्रयास कर रहा है। भले ही अपराधी सामने हो किंतु वह उनकी नजर में शरीफ ही रहता है और जो जरा भी गलती कर दे, उसे बड़े से बड़े अपराध में फंसाने के लिए कई धााराएं लगाकर जेल भेजने का काम करता है। हमारी पुलिस तो अब आंखें मंूदकर प्राथमिकी दर्ज कर रही है। शिकायत मिली और जिसके खिलाफ शिकायत है उससे मतलब हल नहीं होता हो और उस पर साबह की कृपा न हो तो सीधे अंदर डालने के लिए उतावले नजर आते हैं। इसी राह पर चलते हुए पुलिस ने कानून को अपना खेल बनाते हुए मनमानी शुरू कर दी है। पुलिसिया कार्रवाई से पीडि़त जुबान भी नहीं खोल पा रहे हैं। कलेक्टर भले ही धारा 144 लगाकर मामलों को प्रतिबंध करे, किंतु पुलिस को कभी उसकी अनदेखी नजर ही नहीं आती है। परदेशीपुरा में पिछले दिनों कंाग्रेसियों ने बगैर अनुमति के प्रदर्शन किया और बाद में भाजपाइयों ने खुलेआम दादागीरी की, पर पुलिस मौन रही। धारा 144 का उल्लंघन देखकर भी नियमों को तोडऩे वाले नेताओं पर परदेशीपुरा पुलिस ने धारा 188 के तहत कार्रवाई करना भी उचित नहीं समझा। हर बार इस तरह के मामले सामने आने पर कलेक्टर को अपने किसी अधिकारी के माध्यम से रिपोर्ट दर्ज कराना होती है, तब कार्रवाई की जाती है। मकान मालिक किराएदार या नौकरों के मामले हो, पुलिस ने आज तक अपने थाना क्षेत्र में जाकर जानकारी लेना ही उचित नहीं समझा। घटना के बाद ही उसकी नींद खुलती है। आवारा पशुओं को लेकर की गई कार्रवाई में तो पुलिस ने हद ही कर डाली। नेताओं पर लगाम कसने के बजाए उन्होंने कार्रवाई के लिए दो युवाओं को पशुपालक बताकर उन पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई कर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ तक करने से परहेज नहीं किया। जिन लड़कों को पुलिस ने पकड़कर सारी रात बंद रखा और अगले दिन धारा 151 के तहत उनसे बांड भरवाए, वे पढ़ाई या नौकरी कर अपने परिवार की सहायता में लगे हुए हैं। उनके जन्म से पहले से ही माता पिता पशु पालते आ रहे हंै। जिन नेताओं ने गाय पाल रखी है वे गौ भक्त बनकर बच गए, क्योंकि पुिलस उन पर कार्रवाई कर अपनी नौकरी दांव पर पर नहीं लगा सकती।बड़े पदों पर बैठे नेताओं के खास उक्त लोगों पर मेहरबानी कर अन्य छोटे नेताओं के नवयुवा बच्चों को पकड़कर अपना काम पूरा कर आला अधिकारियों की नजर में खास बनने के चक्कर में वे भूल गए कि उनके क्षेत्र में आवारा पशुओं का जमघट उनके थाने के आसपास या चौकी के सामने ही अधिक होता है और कई बार दुर्घटनाएं भी उनके कारण हो चुकी हंै। गत वर्ष परेदेशीपुरा व भागीरथपुरा के मध्य बने पुल के दोनों ओर एक सांड़ व गाय ने इस तरह से आक्रोश दिखाया कि वहां से निकलने वाले हर वाहन को टक्कर मारी और पैदल लोगों को सिंग से घाायल कर दिया। पुलिस की शहर में चल रही कार्रवाई में बाड़े तोड़े जा रहे हंै किंतु भाजपा प्रभावित क्षेत्रों में आज तक कोई पहुंचने की हिम्मत तक नहीं कर रहा है। शुभम की हत्या करने वाला युवक तो पकड़ा गया, किंतु एक नेता ने दोनों थानों पर जाकर अपनों को बचा लिया। थाना प्रभारी से बातचीत होते ही चंद लोगों को पकडऩे के बाद छोड़ दिया और कुछ को बंद रखा। कार्रवाई मात्र स्मार्ट सिटी वाले क्षेत्र में ही कर लोगों को बेघर करने से पशुपालन मुक्त शहर बनाने की कल्पना शायद निगम व अन्य विभागों की बौखलाहट का नतीजा है।

महेन्द्र पाठक
(वरिष्ठ पत्रकार)

(लेखक परिचय : इंदौर के सांध्य दैनिक हैलो हिन्दुस्तान में विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत् हैं। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर भी लगातार सक्रिय)

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