सलाम… इंदौर नगर निगम को


अमूमन किसी भी शहर की नगर निगम को ज्यादातर आलोचना सहना पड़ती है… किसी अन्य सरकारी विभाग की तुलना में लोगों का सबसे अधिक वास्ता नगर निगम से ही पड़ता है, क्योंकि उसकी रोजमर्रा की जिंदगी के ज्यादतर कामकाज यानि सड़क, गटर, बिजली, पानी, आवास, सफाई इत्यादि निगम से ही जुड़़े रहते हैं… एक पत्रकार होने के नाते पिछले 20 सालों से इंदौर नगर निगम को बड़ी नजदीकी से देखने-समझने का मौका मिला है और अतिक्रमण, अवैध निर्माण, आवारा पशु से लेकर गंदगी तथा भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर निगम को एक्सपोज भी करता रहा हूं… शहर की मातृ संस्था होने के नाते नगर निगम के अमले की जिम्मेदारी भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है… तमाम कमियों और खामियों के बावजूद इस बात को कहने में कोई संकोच नहीं है कि इंदौर शहर आज से पहले कभी भी इतना साफ-सुथरा नजर नहीं आया…


इंदौर की महापौर श्रीमती मालिनी गौड़ और निगमायुक्त मनीष सिंह नि:संदेह इस उपलब्धि के लिए सराहना के पात्र हैं… नगर निगम वैसे तो राजनीति का सबसे बड़ा अखाड़ा रहा है और मौजूदा वक्त में भी चुने हुए जनप्रतिनिधि यानि महापौर के साथ 85 पार्षदों की फौज भी है… शहर को कचरे से मुक्ति दिलाने के विगत दो दशकों में तमाम प्रयास किए गए, जिनका साक्षी मैं भी हूं… कांग्रेसी महापौर मधुकर वर्मा से लेकर ताकतवर नेता रहे कैलाश विजयवर्गीय, उसके बाद उमाशशि शर्मा और फिर वरिष्ठ राजनेता और संगठन महामंत्री रहे कृष्णमुरारी मोघे का कार्यकाल भी देखा… इन तमाम महापौरों ने शहर को आवारा पशु से मुक्ति दिलाने के साथ-साथ कचरे और गंदगी से निजात दिलाने के भी तमाम दावे किए मगर सफलता हासिल नहीं कर सके… तारीफ करना होगी महापौर श्रीमती मालिनी गौड़ की, जिन्होंने पूरी दबंगता से जहां स्मार्ट सिटी के लिए सड़कों को चौड़ा करने के लिए मकानों को जमींदोज करवाया, वहीं खुले में शौच के साथ स्वच्छता के मामले में भी इंदौर को गौरव दिलवाया… आज विदेश में रहने वाले भी तमाम लोग इंदौर की साफ-सफाई की प्रशंसा कर रहे हैं और नागरिकों को भी पहली बार साफ-सुथरा शहर दिख रहा है… निगम में कई आयुक्त रहे मगर मौजूदा आयुक्त मनीष सिंह ने जिस तरह से नगर निगम को शहर में सक्रिय किया, उसकी भी कोई जोड़ नहीं है… व्यक्तिगत रूप से पिछले 20 सालों से मनीष सिंह की कार्य प्रणाली को नजदीक से देखने के बाद मेरा ये स्पष्ट मत है कि उनके जैसे तेज-तर्रार और काबिल अफसरों की ही सरकारों को जरूरत है… आज पूरे इंदौर में नगर निगम की पीली गाडिय़ां सुबह से रात तक घूमती नजर आती है और झाड़ू भी जमकर लग रही है, कचरा वाहनों में बजने वाला गीत तो सबकी जुबान पर चढ़ गया और सुबह लोग अपना टाइम-टेबल इसके हिसाब से सेट करने लगे हैं… प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छ भारत का नारा तो दिया मगर उनका अभियान फोटोशॉपी में तब्दील होकर ही रह गया और जनता को जागरूक करने के विज्ञापन और नारे ही अधिक गढ़े गए बजाय मैदानी अमल करवाने के… मेरा तो मानना है कि इंदौर नगर निगम ने जिस तरह स्वच्छता का अभियान चलाने में खुद को झोंका और उसमें फिर जनता का सहयोग लिया, इसी फार्मूले की तर्ज पर पूरे भारत का स्वच्छता अभियान मोदी सरकार को अमल में लाना चाहिए… सिर्फ नामी-गिरामी शख्सियतों के हाथों में झाड़ू पकड़ाकर जनता को कचरा न फैंकने की सलाह देने भर से भारत कभी भी स्वच्छ नहीं हो सकता, जब तक कि उसके लिए साधन-संसाधन और पर्याप्त अमले के साथ जनप्रतिनिधि और अफसरों का तालमेल न हो और वे खुद सड़कों पर न उतरें… अब बस सवाल यही है कि आज जो इंदौर साफ-सुथरा दिख रहा है क्या कल भी वैसा ही रहेगा..? जानकारों का भी मानना है कि अभी तो निगम को केन्द्र से नम्बर वन का प्रमाण-पत्र चाहिए, लिहाजा वह रात-दिन मेहनत कर रहा है, मगर क्या इस तरह की सफाई को आगे भी मेंटेन किया जा सकेगा..? बात सही है, मगर इसमें कोई दो मत नहीं कि अगर यह अभियान लगातार कुछ महीने सख्ती और सजगता से चलता रहा तो सफाई का एक सिस्टम विकसित हो जाएगा और जनता भी सड़क पर कचरा फैंकना भूलकर उसे डस्टबीन में ही डालेगी… अभी जनता ने निगम का भरपूर साथ दिया है और अब निगम के समक्ष भी यही बड़ी चुनौती रहेगी कि वह इस टीम भावना को बरकरार रखे, ताकि इंदौर आज की तरह ही आगे भी साफ-सुथरा नजर आए… हालांकि निगम के सामने अब एक और बड़ी चुनौती आवारा पशुओं से सड़कों को मुक्ति दिलाने की भी है… फिलहाल तो स्वच्छ भारत मिशन के तहत जो शहरों की रेटिंग का सर्वेक्षण चल रहा है उसमें भी जनता टोल फ्री नम्बर 1969 और 1800111969 के जरिए सर्वे में हिस्सा लेकर इंदौर निगम को रेटिंग दे सकती है… एक बार फिर निगम महापौर और आयुक्त सहित उनकी पूरी टीम को सफाई के मुद्दे पर बधाई… यह सिलसिला जारी रहे…

राजेश ज्वेल

(9827020830)

(लेखक परिचय : इंदौर के सांध्य दैनिक अग्निबाण में विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत् और 30 साल से हिन्दी पत्रकारिता में संलग्न एवं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के साथ सोशल मीडिया पर भी लगातार सक्रिय)

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