ब्रांड मोदी के सफल तीन साल…

इसमें तो कोई दो मत नहीं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुद को एक ब्रांड के रूप में स्थापित कर लिया है… तीन साल के उनके कार्यकाल का समर्थकों द्वारा भले ही बढ़-चढ़कर गुणगान किया जाए या आलोचक पाकिस्तान, कश्मीर, महंगाई या रोजगार जैसे मुद्दों पर उन्हें कठघरे में खड़ा करें, मगर जनता जनार्दन का भरोसा अर्जित करने में मोदी जी ने सफलता पाई है… अच्छे दिन भले ही मुहावरे के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे हों, फिर भी विश्वास कायम है… इसके पीछे बहुत सारे तर्क भी हैं… एक पार्टी के रूप में फिलहाल भाजपा ने पक्ष के साथ विपक्ष की भूमिका का भी निर्वहन कर रखा है, वहीं वह आक्रामक तरीके से अपने किए गए हर कार्य की इतनी जोरदार मार्केटिंग करती है कि जनता अपनी मूलभूत समस्याओं को भूलाकर जयकारे में शामिल हो जाती है… जिस तरह एक आम आदमी ढाई-तीन घंटे की मुंबईया फिल्म देखते हुए अपने सारे दुख-दर्द भूल जाता है, कमोबेश उसी तरह तीन साल की कसी हुई पटकथा और निर्देशन के साथ भाजपा और खासकर मोदी जी ने अपनी फिल्म देश की जनता के सामने सफलता के साथ प्रस्तुत की है… एक सर्वे से पता चला कि 83 प्रतिशत लोग सर्जिकल स्ट्राइक से खुश हैं… अब यह काम कैसे हुआ इसको लेकर मार्केटिंग के विशेषज्ञ अपना माथा खपा सकते हैं… भारतीय सेना हमेशा से ताकतवर रही है और पाकिस्तान को कई मर्तबा धूल चटाने के साथ इस तरह की स्ट्राइक भी करती रही है, मगर पूर्व की सरकारों ने कभी भी इस बात का प्रचार-प्रसार नहीं किया और यह पहला मौका है जब सेना न सिर्फ अधिकृत पत्रकार वार्ताएं ले रही हैं, बल्कि पाक बंकरों की तबाही के वीडियो भी जारी कर रही है… इस रणनीति का ही यह असर है कि सोशल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए घर-घर तक सर्जिकल स्ट्राइक की सफलता को पहुंचाया गया, जिसके चलते नोटबंदी जैसे फैसलों की तमाम खामियां भी छुप गई… क्योंकि इसी सर्वे में 52 प्रतिशत लोग नोटबंदी के तरीके से नाराज नजर आए… कश्मीर समस्या, महंगाई से लेकर महिला असुरक्षा, बेरोजगारी और यहां तक कि मध्यम और निचले स्तर पर भ्रष्टाचार भी कायम है… बावजूद इसके किसी और सरकार को जनता का इतना समर्थन नहीं मिलता, जो ब्रांड मोदी को तीन साल पूरे होने पर हासिल हुआ… परम्परागत मीडिया को कब्जे में करने की रणनीति तो रही ही, वहीं सोशल मीडिया पर भी लगातार फीडिंग की जाती रही और उस पर मोदी जी खुद भाषण कला में प्रवीण हैं हीं… इन सबने मिलकर अच्छे दिनों की फंतासी को इस तरह रचा और बुना कि चहुंओर तालियां बज रही है… अब तक के इतिहास का सबसे नकारा और निकम्मा विपक्ष भी इन तीन सालों में देश ने देख लिया, जिसने ब्रांड मोदी को और मजबूती से स्थापित कर दिया… आक्रामक प्रचार तंत्र ने भाजपा और खासकर मोदी जी की इमेज बनाने में भी महती भूमिका अदा की है… अब इसका विश्लेषण किसी भी तरह से किया जा सकता है… बहरहाल, मोदी जी को तीन साल की बधाई… मगर अब विवादित मुद्दों को हाशिए पर पटककर कश्मीर सहित महंगाई और रोजगार के क्षेत्र में असल मैदानी काम किए जाने की दरकार अवश्य है… फिलहाल तो यह शेर भी बहुत कुछ वर्तमान हालातों को बयां कर देता है…
कातिल की ये दलील मुंसीफ ने मान ली,
मक्तूल खुद गिरा था खंजर की नोंक पर।

(राजेश ज्वेल)
9827020830

(लेखक परिचय : इंदौर के सांध्य दैनिक अग्निबाण में विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत् और 30 साल से हिन्दी पत्रकारिता में संलग्न एवं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के साथ सोशल मीडिया पर भी लगातार सक्रिय)

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