मक्खन (बटर) के पौष्टिक लाभ

(प्रस्तुति: दीप्ति) पोषण की बात की जाये तो किसी भी चीज की अति स्वास्थ्य के लिए बुरी होती है। फिर चाहे पानी ही क्यों न हो। यदि पानी जरूरत से ज्यादा मात्रा में लिया जाता है, तो इससे ‘वाटर टाॅक्सिसिटी‘‘ हो सकती है।

वैज्ञानिक बिरादरी में यह धारणा प्रचलित हो रही है कि मार्गरीन की तुलना में मक्खन और डेयरी उत्पादों में मौजूद नैचुरल सैचुरेटेड फैट (संतृप्त वसा) वास्तव में मनुष्य के लिए बेहतर साबित हो सकता है।

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बेशक इन फैट्स को सेल मेम्ब्रेन्स के प्रमुख घटकों के तौर पर चिन्हित किया गया है और यह निश्चित हार्मोन्स उत्पन्न करने के लिए आवश्यक है और कुछ निश्चित विटामिनों एवं खनिजों के परिवहन एवं अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

पर क्या यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं हैं; वास्तव में, यह स्वास्थ्यवर्धक हैं, विटामिनों से भरपूर हैं, लाभकारी संतृत्प वसायें हैं और एक प्रकार का कोलेस्ट्राॅल हैं, जोकि दिमाग एवं स्नायु तंत्र के विकास के साथ ही एंटी-फंगल, एंटी-आॅक्सिडेंट एवं एंटी-कैंसर गुणों वाले विभिन्न प्राकृतिक कपाउंड्स के लिए आवश्यक हैं।

मनुष्य के फेफड़े, दिल, प्रतिरक्षा तंत्र, लिवर, हड्डियां, हार्मोन्स एवं सेल मेम्बे्रन्स, विटामिन डी का उत्पादन, महत्वपूर्ण विटामिनों एवं खनिजों का परिवहन एवं उपयोग- यह सभी उचित ढंग से कार्य करें, इसके लिए माॅडरेशन में उच्च गुणवत्ता के संतृप्त वसा की जरूरत पड़ती है।

घास खाने वाली गायों के कच्चे दूध से बनाया गया आॅर्गेनिक बटर इस सूची में सबसे शीर्ष है। इसके बाद आरबीजीएच, आरबीएसटी अथवा एंटीबायोटिक्स के बगैर घास खाने वाली गायों के पाश्चुराइज्ड दूध से बना आॅर्गेनिक बटर आता है।

इसमें सबसे नीचे कंफाइंड, अनाज, फैक्टरी फाम्र्ड, एंटीबायोटिक एवं आरबीजीएच अथवा आरबीएसटी इंजेक्टेड गायों के पाश्चुराइज्ड दूध से बने बटर का स्थान है।

हैरानी की बात है कि पिरामिड के सबसे नीचे मौजूद बटर भी मार्गरीन की तुलना में बेहतर है। मार्गरीन लैब में निर्मित प्लास्टिक फूड-जैसा पदार्थ है और यह किसी भी मायने में असली फूड नहीं है।

इसे बनाना आसान है, इसमें कोई पौष्टिक गुण नहीं है, और यह स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है। पर इनकी शेल्फ लाइफ अधिक होती है और असली बटर की तुलना में इनसे अधिक मुनाफा मिलता है।

बटर खाने के 5 लाभ इस प्रकार हैं:

  • काॅन्जुगेटेड लिनोलेइक एसिड (सीएलए): राॅ आॅर्गेनिक पाश्चर्ड बटर में काफी एंटी-ट्यूमर सीएलए होता है। इसमें त्वचा, कोलोन, स्तन एवं फेफड़ों में कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकता है। यह एंटी-फंगस है और मांसपेशियों के विकास को बढ़ावा देता है और शरीर के वजन को भी बढ़ने से रोकता है।
  • ब्यूटाइरिक एसिड: बटर में 4 प्रतिशत ब्यूटाइरिक एसिड होता है – यह एक शाॅर्ट चेन फैटी एसिड है। शोध बताते हैं कि यह ट्यूमर्स को रोकता है। यह संक्रमण होने की स्थिति में प्रतिरक्षा तंत्र को संकेत भेजता है।
  • विटामिन के2: राॅ, आॅर्गेनिक, पाश्चर्ड बटर एवं क्रीम में विटामिन के2 होता है- यह विटामिन डी के संश्लेषण में एक आवश्यक सह-घटक है। के2 ब्लड स्ट्रीम और बोन सेल्स में कैल्सियम को बढ़ाता है और आर्टीरियल एवं हार्ट इश्यू को कैल्सिफाई करने के बजाय बोन डेंसिटी को बढ़ाता है।
  • फैट-साॅल्यूबल विटामिंस: बटर फैट साॅल्युबल विटामिन ए, डी, ई और के का बेहतरीन स्रोत है। यह उनके संचयन का भी शानदार स्रोत है।
  • वुल्जेन फैक्टर: राॅ, अनपाश्चुराइज्ड बटर, क्रीम और दूध में ‘‘वुल्जेन फैक्टर‘‘ होता है। यह एक एंटी-स्टिफनेस एजेंट है। यह जोड़ों के कैल्सिफिकेशन (ओस्टियोआर्थराइटिस) के साथ ही कैट्रेक्ट व पीनियल ग्रंथि का कैल्सिफिकेशन होने से रक्षा करता है। पाश्चुरीकरण इस वुल्जेन फैक्टर को नष्ट कर देता है।

राॅ, आॅर्गेनिक बटर एक सुपरफूड है, जो माॅडरेशन में खाने पर वसा नहीं बनाता। असल में, इसमें शाॅर्ट चेन फैटी एसिड (एससीएफए) और मीडियम चेन फैटी एसिड (एमसीएफए) होते हैं, जोकि उल्लेखनीय रूप से फैट के रूप में जमा नहीं होते और इनका इस्तेमाल आसानी से एनर्जी के तौर पर होता है।
बटरफैट ऊर्जा का संकेन्द्रित स्रोत है। यह बेहद इमल्सीफाइड है, जोकि इसके पाचन को बढ़ावा देता है। फैट को बाॅडी तापमान पर तरल अथवा इमल्सीफाइड होना चाहिये, जिससे यह आसानी से पचता/अवशोषित होता है।

यह उपयोगी मात्रा में विटामिन ए उपलब्ध कराता है, जोकि देखने की क्षमता में वृद्धि करता है, त्वचा एवं सेल मेम्ब्रेन की रक्षा करता है और संक्रमण से प्रतिरोध प्रदान करता है। विटामिन डी कैल्सियम मेटाबाॅज्मि एवं हड्डियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

बटरफैट मदद करता है

  • ह्यूमन मैलिगनैंट मेलानोमा, कोलोरेक्टल, ब्रेस्ट, लंग, प्रोस्टैट एवं ओवेरियन कैंसर सेल लाइंस में कोशिका विकास को रोकता है
  • एथेरोसिलरोसिस एवं एंटी-थ्राॅम्बोटिक गुणों के खिलाफ निरोधात्मक भूमिका अदा करता है
  • टाइप 2 डायबिटीज एवं पेरिफेरल इंसुलिन रेजिस्टेंस के खिलाफ निरोधात्मक भूमिका
  • ह्युमरल एवं सेल्युलर प्रतिरक्षा तंत्र, एंटी-इनफ्लेमेटरी गुणों और हड्डियों के विकास में विभिन्न भूमिकायें निभाता है

अलग-अलग स्थितियों में अधिकतर अध्ययनों में निरीक्षण किया गया कि फैट, कार्बोहाइड्रेट, और प्रोटीन जैसे विशिष्ट बृहद पोषक तत्व संतुष्टि में सुधार करते हैं और इसे खाने के बाद पेट भरने का अहसास कराते हैं।

कम वसा वाले भोजन की तुलना में उच्च वसा वाले भोजन पेट से धीरे-धीरे खाली होते हैं। वयस्कों पर किये गये प्राथमिक अध्ययन में पता चला है कि डेयरी फैट नाॅन-डेयरी फैट की तुलना में अलग तरीके से संतुष्टि को प्रभावित करते हैं।

असल में, फ्रांस में स्वस्थ पुरूषों पर किये गये अध्ययन में पता चला कि बटर से युक्त भोजन अगला भोजन लेने की इच्छा में विलंब करता है। कुल मिलाकर, यह मिल्क फैट है, जोकि डेयरी उत्पादों को उनका स्वाद देता है और उनके विशेष फ्लेवर में योगदान करता है।

मिल्क फैट फैट-साॅल्युबल विटामिनों – विटामिन ए, डी, ई और के का वाहक है और इसमें लिपिड घटक एवं फैटी एसिड की व्यापक वैरायटी शामिल होती है

फैटी एसिड सैचुरेटेड, ट्रांस या काॅन्जुगेटेड हों, इन्हें एक एन्टाइटी केरूपा में नहीं माना जा सकता। इन सभी के अपने-अपने विशिष्ट भौतिक गुण हैं जोकि मिल्क फैट को सही मात्रा में लेने पर संतुलित आहार का अभिन्न हिस्सा बनाते हैं।

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