मेरे किसान मितरों… छोड़ो खेत.. बेचो रेत..!

एक बार फिर हावर्ड वाले हार्डवर्क वालों से मात खा गए… ढाई की जगह दो प्रतिशत ही गिरी जीडीपी और इसमें भी ट्रम्प-पुतिन जैसे नामुरादों का ही हाथ रहा है, वरना मोदी जी और अपने जेटली जी की नोटबंदी के बाद तो भारत के बागों में बहार ही बहार है… कारोबारियों को तो जीएसटी में माथा खपाने के लिए उलझा दिया और भक्तों से लेकर जनसमुदाय पाकिस्तान, कश्मीर और गाय में व्यस्त है… किसानों की आमदनी 5 सालों में दुगनी होना वैसे भी तय है, बावजूद इसके वे सड़कों पर दूध ढोलने से लेकर सब्जियों को नष्ट करने के देश और समाज विरोधी कृत्यों में लिप्त हैं… गनीमत है कि अभी तक इन किसानों को पाकिस्तान जाने की सलाह नहीं दी गई है… मोदी जी तो 5 साल में किसानों की आय डबल करेंगे, मगर अपने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान जो कि खुद किसान हैं, 5 बार कृषि कर्मण अवॉर्ड के साथ किसानों को सिर से पांव तक चकाचक कर चुके हैं… प्रदेश में जितने भी किसानों ने आत्महत्याएं कीं, उसका कारण नपुसंकता, प्रेम-प्रसंग, नशे की लत से लेकर ऐसे ही दीगर निजी कारण रहे हैं… अभी माथे पर गर्मी चढऩे पर ये किसान सड़कों पर दूध ढोलते और सब्जी फेंकते भी नजर आए… शिवराज जी ने तो खेती को लाभ का धंधा बना ही दिया है और अगर किसानों को यह लाभ भी रास नहीं आ रहा है, तो वे खेत छोड़कर रेत बेचने का धंधा भी कर सकते हैं… शिवराज जी का नया नारा छोड़ो खेत… बेचो रेत… का भी हो सकता है… मध्यप्रदेश में रेत का कारोबार कितना चोखा है, यह बताने की जरूरत नहीं है… 14 साल में प्रदेश से हर तरह का अवैध कारोबार जब खत्म हो चुका है, तो अवैध रेत का आरोप कोई कमल पटेल कैसे लगा सकता है..? सड़कों पर उतरे किसान मितरों से अपनी तो यही अपील है कि खेत छोड़कर रेत के धंधे में उतरें, जिससे वे जल्दी ही शर्मा और सूर्यवंशियों की फॉच्र्यूनी सूची में शामिल हो जाएंगे… बस जेसीबी और डम्परों पर चौहान इंटरप्राइजेस या चौहान ब्रदर्स लिखना भर है, उसके बाद नर्मदा मैया आपकी अपनी है… जमकर लूटो रेत…

(राजेश ज्वेल)
9827020830

(लेखक परिचय : इंदौर के सांध्य दैनिक अग्निबाण में विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत् और 30 साल से हिन्दी पत्रकारिता में संलग्न एवं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के साथ सोशल मीडिया पर भी लगातार सक्रिय)

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