कक्का का ऐलान… हाईवे जाम करेंगे किसान… दिल्ली भी घेरेंगे

इंदौर|

जिस तरह कुछ समय पूर्व रातों रात किसानों ने प्रदेश की राजधानी भोपाल को जाम कर दिया था, ठीक उसी तरह की रणनीति अभी दूध और सब्जियों की सप्लाय रोककर अपनाई गई, जिसकी भनक शासन-प्रशासन को हड़ताल शुरू हो जाने के बाद लगी।

किसानों के चल रहे आंदोलन का जिम्मा अब राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ ने लिया है, जिसे 62 देशभर के किसान संगठनों का प्राप्त है। इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा उर्फ कक्काजी का दो टूक कहना है कि 10 जून तक यह आंदोलन इसी तरह चलेगा और अगले चरण में 9 अगस्त को देशभर के नेशनल हाईवे ठप कर दिए जाएंगे और फिर 23 जनवरी को दिल्ली सहित प्रदेशों की सभी राजधानियों का देशभर से जुटे किसानों द्वारा घेराव किया जाएगा।

पहले कक्का जी भारतीय किसान संघ से ही जुड़े थे, जो कि संघ समर्थित रही है। बाद में किसानों के आंदोलन को उग्र रूप से उठाने के चलते उन्हें किसान संघ से अलग कर दिया गया।

कुछ समय पहले कक्का जी के नेतृत्व में ही भोपाल को जाम किया गया था, जिसके चलते पूरी शिवराज मशीनरी हिल गई थी। उसके पश्चात कक्काजी ने राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के बैनर तले प्रदेश और देश के किसान संगठनों को जोडऩा शुरू किया और अभी तक 62 संगठन जुड़ चुके हैं, जिसके चलते अभी मध्यप्रदेश के अलावा महाराष्ट्र के किसानों ने भी दूध-सब्जी की आपूर्ति ठप कर रखी है और जल्द ही यह आंदोलन हरियाणा, राजस्थान सहित अन्य राज्यों में भी इसी तर्ज पर शुरू होगा।

आज दोपहर 12 बजे संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा उर्फ कक्काजी और प्रदेश अध्यक्ष देवनारायण पटेल ने इंदौर के पत्रकारों से चर्चा भी की। एक चर्चा में कक्काजी ने कहा कि जिस तरह हमने भोपाल को गोपनीय रणनीति बनाकर जाम किया था, उसी तर्ज पर यह आंदोलन शुरू किया गया, जिसकी भनक शासन-प्रशासन को नहीं लगने दी गई।

उनका कहना है कि शिवराज सरकार उन्हें कहीं भी आंदोलन या धरने करने की अनुमति नहीं देती है, जिसके चलते अब यह रणनीति बनाई गई है। 1 जून से शुरू हुआ यह आंदोलन 10 जून तक चलेगा और आगामी लोकसभा चुनाव तक देशभर में यह आंदोलन चलाया जाएगा। 5 साल से जो कृषि कर्मण्य अवार्ड मध्यप्रदेश को मिल रहा है उसमें फर्जी आंकड़ों का सहारा लिया गया।

वहीं राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा का कहना है कि चरणबद्ध तरीके से देशभर के किसान ये काली पट्टी अपनी मांगें पूरी न हो जाने तक बांधकर रखेंगे। अगले चरण में हरियाणा और उसके बाद फिर राजस्थान के किसान काली पट्टी बांधेंगे।

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