बुलेट ट्रेन में मिलेगा रे मूर्खों ए-क्लास खाना!

मुए कैग का तो काम ही यही है ऊँगली करना… पहले कांग्रेस के 2जी स्पैक्ट्रम और कोयला घोटाला से लेकर कॉमनवेल्थ पर कैग ने पोलपट्टी खोली और नतीजे में मोदी सरकार देश पर काबिज हो गई… कैग की रिपोर्ट विपक्ष में रहने तक भाजपा के लिए अत्यंत पवित्र थी, जो अब चर्चा के भी लायक नहीं बची… अभी कैग ने खुलासा किया कि रेलवे का खाना इंसानों के खाने लायक नहीं है… अरे भाई जब देश में अभी तक इंसानों के रहने लायक मूलभूत सुविधाएं ही सरकारें नहीं जुटा पाई, तब रेलवे ने क्या सेहतमंद खाना खिलाने का ठेका ले रखा है..? अपने नए राष्ट्रपति कोविंद जी ने गरीब और मजदूरों की टपकती फूस की छतों का हवाला दिया ही है और रायसीना में रहने के बाद भी वे टपकती छतों को नहीं भुलेंगे और 5 साल में देश के हर गरीब और मजदूर को चमचमाती, बिना टपकती पक्की छतें दिलवा देंगे… भरोसे पर दुनिया कायम है और अपना देश तो रामभरोसे चल ही रहा है… अब रेलमंत्री सुरेश प्रभु बेचारे ट्वीटर-ट्वीटर खेलें या रेलवे का खाना चखते फिरें..? अभी मोदी जी का फोकस बुलेट ट्रेन पर है, तब तक रेल यात्रा करने वाले केटल क्लास के मूर्खों अभी तुम अच्छे खाने के लायक नहीं बने हो… जबरन क्यों अपना पेट खराब करना चाहते हो… प्रभु जी की रेलों में इसीलिए घटिया खाना दिया जा रहा है, ताकि रेल यात्रियों की आदतें न बिगड़ेे… ढचरा यात्रा करने की आदत पड़ी है, उसमें ए-क्लास खाना कैसे हजम करोगे..? इसलिए मूर्खों बुलेट ट्रेन के साथ उसमें परोसे जाने वाले 5 सितारा ए-क्लास खाने का इंतजार करो… भक्तों की बात भी सुन लिया करो, जो हर बात में 70 साल का पुराण खोलकर बैठ जाते हैं… अब तीन साल में रेलवे के खाने को कैसे खाने लायक कर दें..? और हां, कैग ने जो सेना के संबंध में रिपोर्ट दी है, उसे तो पूरी तरह से नजरअंदाज ही कर देना… अगर उस पर कोई कमेंट किया, तो पाकिस्तान जाने की सलाह के साथ देशद्रोही अलग कहलाओगे… मेरा तो मानना है कि कैग जैसी संस्थाओं को अब बंद ही कर देना चाहिए, क्योंकि इसका काम वैसे भी अब खत्म हो गया… सत्ता अपने को मिल ही गई है… जै-जै सियाराम!

(राजेश ज्वेल)
9827020830

(लेखक परिचय : इंदौर के सांध्य दैनिक अग्निबाण में विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत् और 30 साल से हिन्दी पत्रकारिता में संलग्न एवं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के साथ सोशल मीडिया पर भी लगातार सक्रिय)

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