`आंकड़ेबाजी’ से ही खत्म हो रहा प्रदूषण!

इंदौर|

आज विश्व पर्यावरण दिवस का ढकोसला हर साल की तरह किया जाएगा और पर्यावरण घटाने की बजाय हर दिन इसमें इजाफा ही होता रहा है। अंधाधुंध पेड़ों की कटाई और वाहनों की लगातार बढ़ती संख्या के बीच तमाम इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का प्रयोग बढ़ता जा रहा है। भीषण गर्मी के चलते अब ए.सी. का भी प्रयोग बढ़ता जा रहा है, जिससे और अधिक पर्यावरण बिगड़ रहा है।

इंदौर की बात की जाए तो आबादी के मान से 34 लाख पेड़ों की जरूरत है और कुछ समय पूर्व एनजीटी के आदेश से पेड़ों की जो गणना की गई थी उसमें मात्र एक लाख 9 हजार पेड़ ही पाए गए।

इंदौर में विगत वर्षों में तमाम प्रोजेक्टों और विकास के नाम पर 15 हजार से अधिक हरे-भरे पेड़ काट दिए गए हैं और यह सिलसिला अभी भी जारी है। अभी सरदार सरोवर बांध में 74 गांव डूब में आ रहे हैं, जिसमें 16 हजार पेड़ काटने के आदेश जारी हो गए हैं।

ग्लोबल वार्मिंग की चेतावनी तो अब पुरानी हो चुकी है और इसका असर दुनिया के किसी भी देश पर नहीं पड़ता, क्योंकि चारों तरफ अत्याधुनिक होने की होड़ मची है।

साल के 365 दिनों में भी अब मौसम के मिजाज कभी भी बदल जाते हैं। सर्दी और बारिश के दिन तो लगातार घटते गए और गर्मी के दिन बढ़ते जा रहे हैं। भूजल स्तर अत्यंत नीचे गिर गया है, तो हरियाली का खात्मा करते हुए सीमेंट कॉन्क्रीट के जंगल विकास के नाम पर तैयार हो रहे हैं।

इंदौर ही विगत कुछ वर्षों में सीमेंट कॉन्क्रीट के जंगल में तब्दील हो गया। चौड़ी सड़कों, फ्लाई ओवरों के साथ-साथ अन्य प्रोजेक्टों के लिए बेरहमी से वर्षों पुराने हरे-भरे पेड़ों को काट दिया गया।

पर्यावरण सहित अन्य मुद्दों पर संघर्ष करने वाले समाजसेवी किशोर कोडवानी के मुताबिक एक व्यक्ति के साथ एक पेड़ होना चाहिए। 24 घंटे में एक व्यक्ति को जो 14 किलो ऑक्सीजन लगती है उतनी ही एक पेड़ से प्राप्त होती है।

एनजीटी के निर्देश पर इंदौर में पहली बार पेड़ों की भी विधिवत गणना की गई। दरअसल पेड़ को लेकर तय मापदण्ड भी बनाए गए हैं। 30 सेंटीमीटर चौड़ाई जिस तने की होती है उसे ही पेड़ कहा जाता है और एक पेड़ कम से कम 10 स्क्वेयर फीट के क्षेत्रफल में छाया देता है।

अभी तक तमाम सरकारी विभाग पौधों को ही पेड़ों के रूप में गिनकर आंकड़े प्रस्तुत करते रहे, मगर इस गणना से उसकी भी पोलपट्टी खुल गई। इंदौर जिले की आबादी अगर 35 लाख भी मानी जाए और शहर की आबादी 25 लाख से अधिक हो चुकी है।

यानि कम से कम 35 से लेकर 25 लाख पेड़ होना चाहिए, जबकि गणना में मात्र 1 लाख 9 हजार ही पेड़ पाए गए हैं, जिनकी बकायदा नम्बरिंग भी की गई और ये पेड़ किन-किन प्रजातियों के हैं, इसका भी रिकॉर्ड तैयार किया गया और उनके फोटो भी खींचे गए हैं।

32 हजार से अधिक पेड़ तो नगर निगम के पाए गए, वहीं 72 हजार पेड़ इंदौर विकास प्राधिकरण की तमाम योजनाओं में लगे हैं, वहीं कुछ अन्य पेड़ भी मिले। विगत वर्षों में 15 हजार से अधिक पेड़ों की कटाई का तो घोषित आंकड़ा है, जबकि इससे अधिक पेड़ों की कटाई अघोषित रूप से भी की गई है।

तमाम प्रोजेक्टों के अलावा निजी रूप से भी चोरी-छुपे आए दिन पेड़ों को काट दिया जाता है और इसके एवज में जो 10 पौधे लगाए जाते हैं, वे भी कागजी साबित हुए।

एक तरफ जहां इंदौर में आबादी के मान से पेड़ों की संख्या अत्यंत कम है, वहीं दूसरी तरफ पूरे देश में आबादी के मान से वाहनों की संख्या में इंदौर अव्वल है।

आरटीओ के रिकॉर्ड बताते हैं कि इंदौर में 18 लाख से ज्यादा वाहन रजिस्टर्ड हैं। यानि कि हर दो व्यक्ति के पीछे कोई न कोई सा एक वाहन जरूर मौजूद है और अगर परिवार की बात करें तो इंदौर में 5 से 6 लाख परिवार हैं और जितने सदस्य हैं, लगभग उतने ही वाहन भी हैं।

लोक परिवहन की सुविधा लचर होने के कारण परिवार के हर सदस्य को वाहन अपने रोजमर्रा के कामकाज हेतु रखना पड़ता है। रोजाना इंदौर की सड़कों पर 300 नए वाहन शोरुमों से निकलकर उतर जाते हैं।

सालभर में 1 लाख से अधिक वाहन इंदौर में खरीदे जाते हैं, जिनमें सर्वाधिक संख्या दुपहिया वाहनों की रहती है, उसके बाद कार और अन्य तरह के वाहन आते हैं।

पिछले कई सालों से शिवराज सरकार मानसून के पूर्व इंदौर सहित प्रदेशभर में जोर-शोर से हरियाली महोत्सव का आयोजन करवाती है। अगर विगत 10 वर्षों में हरियाली महोत्सव के दौरान रोपे गए करोड़ों पौधों की मैदानी हकीकत जानी जाए तो पता चलेगा कि इसमें से 10 प्रतिशत पौधे भी जिंदा नहीं बचे, जबकि मुख्यमंत्री की घोषणा रही है कि वे हरियाली महोत्सव में रोपे गए एक-एक पौधे का हिसाब विभागों और उनके अधिकारियों से लेंगे।

इस बार तो नर्मदा के किनारे ही 6 करोड़ से अधिक पौधे रोपने का संकल्प मुख्यमंत्री ने अपनी नमामि देवी नर्मदे यात्रा के दौरान लिया और अब अफसर इस जुगाड़ में लगे हैं कि कैसे इतनी तादाद में पौधे रोपकर दिखाएं?

जाहिर है कि इसमें भी कागजी आंकड़ों की बाजीगरी अधिक की जाएगी। इंदौर में ही हर साल हरियाली महोत्सव पर लाखों पौधे रोपे जाते हैं और नगर निगम से लेकर प्राधिकरण और सभी विभागों को पौधारोपण का लक्ष्य थमाया जाता है, जिसमें वन विभाग लाखों की संख्या में पौधे उपलब्ध कराता है, मगर इंदौर जिले का कुल क्षेत्रफल भी इतना नहीं है, जितने पौधे 10 सालों में हरियाली महोत्सव के दौरान रोपने का दावा शासन-प्रशासन ने किया है। इस बार भी हरियाली महोत्सव में इसी तरह का फर्जीवाड़ा नजर आएगा।

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