फीट रहने के लिए हर सप्ताह 4 घंटे खर्च करती है 60 फीसदी से ज्यादा आबादी

रीबाॅक इंडिया के ’फिट इंडिया सर्वे‘ से हुआ खुलासा

नई दिल्ली

फिटनैस इज़ लाइफ‘ का मंत्र युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के मकसद से रीबाॅक इंडिया ने देष में पहली बार फिटनैस सर्वे कराया जिससे फिटनैस के बारे में काफी कुछ सामने आया है। लेकिन जिन्हें भारत के सेहत से जुड़े पहलुओं को लेकर संदेह रहा है उनके लिए ये आंकड़े यकीनन चैंकाने वाले हैं।

दरअसल, सर्वे से जाहिर हुआ है कि भारत फिटनैस के मोर्चे पर बेहतरीन प्रदर्षन दर्ज करा रहा है। सर्वे में षामिल 10 में से 9 का कहना है फिटनैस बेहद महत्वपूर्ण है और 80 फीसदी से अधिक लोग सेहतमंद जीवनषैली को अपनाने के लिए प्रेरित हैं।

देशभर के 8 षहरों में 20 से 35 साल की आयुवर्क के जिन 1500 से अधिक पुरुशों (54 प्रतिषत) और महिलाओं (46 प्रतिषत) को सर्वे में षामिल किया गया था वे हर हफ्ते कम से कम एक फिटनैस एक्टिविटी से अवष्य जुड़े हुए थे।

कुल मिलाकर जिन षहरों में सर्वे किया गया उनमें पुणे को सर्वाधिक फिटस्कोर यानी 7.65 अंक मिले (षहर में लोग खुद को कितना फिट महसूस करते हैं, हर हफ्ते वे फिटनैस पर कितने घंटे खर्च करते हैं, वर्क आउट कितनी बार करते हैं तथा कितनी फिटनैस एक्टिविटीज़ में भाग लेते हैं का कुल योग) जबकि चंडीगढ़ 7.35 अंकों के साथ फिटनैस मीटर पर दूसरे नंबर पर रहा।

सर्वे के नतीजे जारी करते हुए सुश्री सिल्सिवया टैलाॅन, सीनियर मार्केटिंग डायरेक्टर, रीबाॅक इंडिया ने बताया, ’’भारत ऐसा देष है जो हमेषा से फिटनैस की बजाय फूड की दीवानगी के लिए जाना जाता रहा है।

लेकिन यह जानना सुखद है कि देष की युवा पीढ़ी अधिक सेहतमंद और अधिक फिट जीवनषैली को अपनाने की दिषा में लगातार बढ़ रही है। आप औसत मानव जीवन को यदि 71 वर्श आंके तो यह कुल 25,915 दिन का होता है।

यानि, हमारे पास अपने समय का बेहतरीन इस्तेमाल करने के 25,915 अवसर होते हैं और इन अवसरों का लाभ उठाते हुए हम फिटनैस सुनिष्चित कर हमें मिले षरीर का सम्मान कर सकते हैं।

रीबाॅक में हम उपभोक्ताओं को ’फिटनैस इज़ लाइफ‘ का मूलमंत्र अपनाने के लिए प्रेरित करने का कोई अवसर छोड़ना नहीं चाहते ताकि वे षारीरिक रूप से बेहतर बन सकें। रीबाॅक का मानना है कि हम खुद को बेहतर करने के लिए प्रेरित कर तथा अपनी षारीरिक सीमाओं की परख कर न सिर्फ अपने षरीर को बेहतर बनाते हैं बल्कि अपना पूरा जीवन भी बदल देते हैं।‘‘

भारतीयों की फिटनैस की नब्ज़ को टटोलने वाले इस फिट इंडिया सर्वे ने कई रोचक नतीजों का खुलासा भी किया है जिसमें लोगों की फिटनैस गतिविधियों, फिटनैस जानकारी के स्रोतों, खरीदने की आदतों जैसे कई पहलू षामिल हैं।

आज के तनावपूर्ण जीवन में, अपनी सेहत से जुड़े लक्ष्यों को नज़रंदाज़ करना आसान है। सर्वे से स्पश्ट हुआ है कि 80 फीसदी से अधिक महिलाएं सेहतमंद जीवनषैली के लिए पूरी तरह सजग होकर प्रयास करती हैं।

सिर्फ एक तरह का व्यायाम करने की बजाय 65 फीसदी ग्रुप में या अपने पार्टनर के साथ स्ट्रैच, बैंड, रन और स्क्वैट करना पसंद करती हैं। सर्वे से यह भी खुलासा हुआ है कि भारतीय अपनी फिटनैस बरकरार रखने के लिए सिर्फ एक किस्म की एक्टिविटी तक सीमित नहीं रहते।

वे तरह-तरह की एक्टिविटी करना चाहते हैं, 10 में से महज़ 2 ही लोग एक प्रकार की एक्टिविटी तक सीमित रहते हैं, बाकी दो से अधिक से जुड़े हुए हैं।

फिटनैस के तौर-तरीकों को जानना

इंटरनेट और सोषल मीडिया आज भारत में फिटनैस की दुनिया में काफी बदलाव ला रहा है और यूट्यूब को फिटनैस जानकारी के सर्वाधिक पसंदीदा स्रोत के रूप में देखा जाता है तथा इसके बाद अन्य सोषल मीडिया साइटें हैं। षरीर को लेकर लोग अब पहले से अधिक जागरूक हुए हैं और अपने स्वास्थ्य को लेकर अधिक सजर्क तथा सजग बने हैं।

सर्वाधिक फिट दिखने की चाह

ब्रांड्स अब तरह-तरह के स्मार्ट षूज़ और एप्रैल पेष करते हैं, जिसके चलते 81 फीसदी लोगों में फैषनेबली फिट बने रहने की चाहत साफ दिखायी देती है। 86 फीसदी का मानना है कि टैक्नोलाॅजी के स्तर पर फिटनैस बैंड और स्पेषल षूज़ डिजाइन जैसी पहल वर्कआउट में काफी अहमियत रखती हैं।

जैंडर के स्तर पर एक और दिलचस्प रुझान यह सामने आया है कि 55 फीसदी पुरुश परफैक्ट फिट पसंद करते हैं जबकि 56 फीसदी महिलाएं सुविधाजनक गीयर को प्राथमिकता देती हैं।

20 से 35 वर्श की आयुवर्ग के अधिक ग्राहक फिटनैस गीयर खरीदने के लिए तत्पर रहते हैं और करीब 47 फीसदी हर साल फिटनैस एप्रैल पर 8000/रु या अधिक तथा 43 फीसदी साल में दो दफा गीयर की खरीदारी पर खर्च करते हैं।

64 फीसदी ने अपने जूता प्रेम को स्वीकार करते हुए कहा कि वे साल में कम से कम एक दफा अपने लिए उपयुक्त किस्म का फुटवियर खरीदने पर निवेष करते हैं।

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